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Digital Arrest Kya hota Hai ? जानिए फर्जी पुलिस कॉल और साइबर ठगी की सच्चाई

Digital Arrest Kya Hota Hai? भारत में बढ़ता खतरनाक ऑनलाइन फ्रॉड

Digital Arrest kya hota hai? जानिए फर्जी पुलिस कॉल और साइबर ठगी की सच्चाई

आज के डिजिटल दौर में साइबर अपराध केवल बैंक हैकिंग या OTP चोरी तक सीमित नहीं रहे हैं। अब ठगों ने एक नया और बेहद खतरनाक तरीका अपनाया है, जिसे “डिजिटल अरेस्ट” कहा जा रहा है। यह कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि डर और मानसिक दबाव के ज़रिए पैसे ठगने का एक साइबर स्कैम है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस स्कैम का शिकार केवल अनपढ़ या तकनीक से अनजान लोग ही नहीं, बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर, बिज़नेसमैन, सरकारी कर्मचारी और पढ़े-लिखे प्रोफेशनल्स भी हो रहे हैं।

यदि आप इस विषय को अंग्रेज़ी में पढ़ना चाहते हैं, तो आप  “What Is  Digital arrest” लेख भी देख सकते हैं।

Table of Contents

डिजिटल अरेस्ट क्या है ( Digital Arrest Kya Hai )?

डिजिटल अरेस्ट एक फर्जी साइबर स्कैम है, जिसमें ठग खुद को पुलिस, साइबर क्राइम अधिकारी, CBI, कस्टम्स या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर फोन या वीडियो कॉल के ज़रिए यह दावा करते हैं कि आप किसी गंभीर अपराध में शामिल हैं और आपको “डिजिटल रूप से गिरफ्तार” किया जा रहा है।

असलियत में:

  • डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती

  • भारत में किसी को फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तार नहीं किया जा सकता

यह पूरा खेल डर, घबराहट और जल्दबाज़ी पर आधारित होता है।


डिजिटल अरेस्ट स्कैम कैसे काम करता है?

यह स्कैम अचानक नहीं होता, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति के तहत अंजाम दिया जाता है।

1. पहला फोन कॉल – शक पैदा करना

पीड़ित को कॉल करके कहा जाता है:

  • आपके आधार कार्ड से अवैध गतिविधि जुड़ी है

  • आपके नाम पर एक पार्सल पकड़ा गया है

  • आपके बैंक अकाउंट का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है

  • आपके मोबाइल नंबर से अपराध हुआ है

इसका मकसद डर पैदा करना नहीं, बल्कि दिमाग में शक बैठाना होता है।


2. खुद को बड़ा अधिकारी बताना

इसके बाद कॉल किसी “सीनियर ऑफिसर” को ट्रांसफर की जाती है।
कई मामलों में:

  • वीडियो कॉल की जाती है

  • सामने वाला पुलिस की वर्दी में दिखता है

  • कानूनी शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है

इससे पीड़ित को लगता है कि मामला सच में गंभीर है।


3. डर और अलगाव (Isolation)

पीड़ित से कहा जाता है:

  • किसी को भी इस बारे में मत बताइए

  • परिवार या वकील से बात नहीं करनी है

  • कॉल काटना मना है

यहीं से मानसिक गिरफ्तारी शुरू होती है।


4. पैसे की मांग

कुछ घंटों तक डराने के बाद कहा जाता है:

  • अकाउंट “वेरिफिकेशन” के लिए पैसे जमा करें

  • केस बंद कराने के लिए सिक्योरिटी डिपॉज़िट दें

  • कोर्ट क्लियरेंस फीस भरें

डर के कारण लोग तुरंत पैसे ट्रांसफर कर देते हैं


5. ठग गायब

जैसे ही पैसे मिलते हैं:

  • कॉल बंद

  • नंबर स्विच ऑफ

  • कोई जवाब नहीं

तब जाकर पीड़ित को एहसास होता है कि वह ठगी का शिकार हो चुका है।

डिजिटल अरेस्ट स्कैम इतना खतरनाक क्यों है?

यह तकनीक नहीं, मन को निशाना बनाता है

यह स्कैम सिस्टम को नहीं, बल्कि इंसानी दिमाग को हैक करता है।

  • डर से सोचने की क्षमता खत्म हो जाती है

  • वर्दी देखकर भरोसा बन जाता है

  • जल्दबाज़ी में गलत फैसले हो जाते हैं


पीड़ित को अकेला कर दिया जाता है

परिवार या दोस्तों से बात न करने का दबाव इसलिए बनाया जाता है ताकि:

  • कोई सच्चाई न बता सके

  • कोई सही सलाह न दे सके


मानसिक असर लंबे समय तक रहता है

पैसे जाने के बाद भी पीड़ित को:

  • शर्म

  • तनाव

  • आत्मग्लानि

  • नींद की समस्या

जैसी परेशानियाँ झेलनी पड़ती हैं।


डिजिटल अरेस्ट से जुड़े कुछ ज़रूरी सच

इन बातों को हमेशा याद रखें:

  • पुलिस फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती

  • कोर्ट WhatsApp या Zoom पर केस नहीं चलाता

  • कोई सरकारी अधिकारी फोन पर पैसे नहीं मांगता

  • गुप्त जांच” के नाम पर परिवार से छुपाने को नहीं कहता

अगर कोई ऐसा कहता है, तो वह 100% स्कैम है।

अगर आपको डिजिटल अरेस्ट की कॉल आए तो क्या करें?

1. घबराएं नहीं

डर ठगों का सबसे बड़ा हथियार है।

2. कोई जानकारी शेयर न करें

OTP, बैंक डिटेल्स, आधार, पैन – कुछ भी नहीं।

3. कॉल काट दें

सच्चा अधिकारी कभी आपको कॉल काटने से नहीं रोकेगा।

4. किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें

एक बातचीत पूरा स्कैम उजागर कर सकती है।

5. तुरंत शिकायत दर्ज करें

जल्दी शिकायत करने से पैसे बचने की संभावना बढ़ जाती है।


डिजिटल अरेस्ट स्कैम का शिकार कौन होते हैं?

आमतौर पर:

  • पढ़े-लिखे लोग

  • प्रोफेशनल्स

  • पहली बार ऐसी कॉल पाने वाले

क्योंकि ठगों को पता है कि ये लोग:

  • कानून से डरते हैं

  • अपनी इज़्ज़त को लेकर सतर्क होते हैं


क्या डिजिटल अरेस्ट सच में कानूनी शब्द है?

नहीं।
डिजिटल अरेस्ट कोई कानूनी शब्द नहीं है और न ही भारतीय कानून में ऐसा कोई प्रावधान मौजूद है। यह केवल साइबर अपराधियों द्वारा गढ़ा गया शब्द है।


समाज और जागरूकता की भूमिका

सरकार और पुलिस अपने स्तर पर प्रयास कर रही है, लेकिन:

  • हर घर तक जानकारी पहुँचना ज़रूरी है

  • परिवारों में इस पर खुलकर बात होनी चाहिए

  • ऑफिस और स्कूलों में साइबर अवेयरनेस ज़रूरी है

जागरूक नागरिक ही सबसे मजबूत सुरक्षा हैं।


निष्कर्ष: असली गिरफ्तारी दिमाग की होती है

डिजिटल अरेस्ट में न हथकड़ी होती है, न जेल।
असल गिरफ्तारी तब होती है जब:

  • डर सोचने की ताकत छीन ले

  • घबराहट सही और गलत का फर्क मिटा दे

याद रखें:

कोई भी असली सरकारी अधिकारी आपको फोन पर डराकर पैसे नहीं मांगेगा।

सतर्क रहें, जानकारी साझा करें और दूसरों को भी जागरूक करें — क्योंकि आपकी जागरूकता किसी और को ठगी से बचा सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs): Digital Arrest Scam

What Is Digital Arrest Meaning In Hindi?

डिजिटल अरेस्ट एक फर्जी साइबर स्कैम है, जिसमें ठग खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी बताकर फोन या वीडियो कॉल के ज़रिए लोगों को डराते हैं और पैसे ऐंठते हैं। भारत में डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है।

Digital arrest kya hota hai?

डिजिटल अरेस्ट एक फर्जी साइबर स्कैम है जिसमें ठग खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और पैसे ऐंठते हैं।


क्या पुलिस फोन या वीडियो कॉल पर अरेस्ट कर सकती है?

नहीं। पुलिस कभी भी फोन, WhatsApp या वीडियो कॉल के ज़रिए किसी को गिरफ्तार नहीं करती। गिरफ्तारी हमेशा कानूनी प्रक्रिया और भौतिक रूप से की जाती है।


डिजिटल अरेस्ट स्कैम में ठग पैसे क्यों मांगते हैं?

ठग पीड़ित को डराकर यह कहते हैं कि केस बंद कराने, अकाउंट वेरिफिकेशन या कोर्ट क्लियरेंस के लिए पैसे देने होंगे। असल में यह सिर्फ ठगी का तरीका होता है।


डिजिटल अरेस्ट कॉल आने पर क्या करना चाहिए?

डरें नहीं, कॉल तुरंत काट दें, कोई भी व्यक्तिगत या बैंक जानकारी साझा न करें, परिवार से बात करें और तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करें।


क्या कोई सरकारी एजेंसी फोन पर पैसे मांग सकती है?

नहीं। कोई भी सरकारी विभाग, पुलिस या कोर्ट फोन कॉल या ऑनलाइन ट्रांसफर के ज़रिए पैसे नहीं मांगता। ऐसा होने पर वह 100% स्कैम होता है।


डिजिटल अरेस्ट स्कैम का शिकार कौन लोग होते हैं?

इस स्कैम का शिकार ज़्यादातर पढ़े-लिखे और प्रोफेशनल लोग होते हैं, जैसे डॉक्टर, इंजीनियर, बिज़नेसमैन और सरकारी कर्मचारी, क्योंकि ठग कानूनी डर और सामाजिक प्रतिष्ठा का फायदा उठाते हैं।


क्या डिजिटल अरेस्ट एक कानूनी शब्द है?

नहीं। डिजिटल अरेस्ट कोई कानूनी शब्द नहीं है और भारतीय कानून में इसका कोई अस्तित्व नहीं है। यह सिर्फ साइबर अपराधियों द्वारा बनाया गया शब्द है।

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